Mera Priya Tyohaar Essay In Hindi-Diwali: मेरा प्रिय त्योहार पर निबंध – दिवाली त्योहारों का हमारे जीवन में एक खास महत्व होता है। ये सिर्फ कुछ दिन की छुट्टियाँ नहीं होतीं, बल्कि परिवार, समाज और हमारी संस्कृति से जुड़े अनगिनत भावनाओं का एक खूबसूरत संगम होती हैं। मेरे लिए, सभी त्योहारों में से दिवाली सबसे खास है। इसे ही मैं “मेरा प्रिय त्योहार” कह सकता हूँ, क्योंकि दिवाली सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि बचपन से ही मेरे दिल से जुड़ा हुआ है। इस दिन के साथ मेरी कई यादें, कई अनुभव और कई भावनाएँ जुड़ी हुई हैं।
दिवाली की तैयारी का उत्साह तो कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तो माँ और पिताजी के साथ मिलकर घर की सफाई करता था। घर को साफ करना और उसे सजाना, दिवाली की पहली तैयारी होती थी। मेरे माता-पिता कहते थे कि इस दिन लक्ष्मी माता हमारे घर आती हैं, और अगर घर साफ-सुथरा नहीं होगा तो वे नाराज़ हो जाएँगी। ये बातें सुनकर मैं और भी ज्यादा मन लगाकर घर सजाता। दीवारों पर रंग-बिरंगी लाइट्स लगाना, दरवाजे पर सुंदर रंगोली बनाना, और खिड़कियों पर दीयों की कतार लगाना मेरे लिए खास खुशी की बात थी।
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दिवाली का दिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उस दिन पूरे घर में एक विशेष ऊर्जा और खुशहाली का माहौल होता है। सुबह से ही मिठाइयाँ बननी शुरू हो जाती हैं। माँ के हाथों की बनी गुजिया, लड्डू और काजू कतली की खुशबू से पूरा घर महक उठता है। मुझे आज भी याद है कि कैसे मैं मिठाई बनाने में माँ की मदद करता था, और बीच-बीच में छुपकर मिठाइयाँ भी खा लेता था। वो बचपन की शरारतें आज भी मेरे दिल के बहुत करीब हैं।
Mera Priya Tyohaar Essay In Hindi-Diwali: मेरा प्रिय त्योहार पर निबंध – दिवाली
शाम होते ही, हम सब नए कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी में जुट जाते थे। लक्ष्मी पूजन का वो पल बहुत खास होता है। पूजा के दौरान जब पूरे घर में शंख और घंटियों की ध्वनि गूँजती है, तब एक अद्भुत शांति और सुख का अनुभव होता है। मुझे आज भी याद है, जब पहली बार पिताजी ने मुझे पूजा की थाली पकड़ने का मौका दिया था। वह पल मेरे लिए गर्व और खुशी का मिला-जुला एहसास था।
पूजा के बाद आता है मेरा सबसे पसंदीदा हिस्सा – दीयों और पटाखों का। जब पूरा घर दीयों की रौशनी से जगमगा उठता है, तब वह दृश्य देखकर मन को एक अलग ही आनंद मिलता है। ऐसा लगता है जैसे अंधकार की जगह उजाला ले रहा हो, और जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भर रही हो। मुझे दीयों की रोशनी में बैठकर आसमान को निहारना बहुत अच्छा लगता था।
पटाखों का धमाका, उनके रंग-बिरंगे नजारे, और दोस्तों के साथ मिलकर उन्हें चलाना मेरे लिए दिवाली की सबसे रोमांचक यादों में से एक है। हालांकि, अब समय के साथ मुझे समझ आ गया है कि हमें पटाखों को ज्यादा नहीं जलाना चाहिए, क्योंकि इससे प्रदूषण होता है, लेकिन उस समय बचपन की मासूम खुशी कुछ और ही थी।
दिवाली के बाद का दिन भी अपने आप में खास होता है। मेरे परिवार में, हम सब लोग दिवाली के अगले दिन रिश्तेदारों और दोस्तों के घर मिठाइयाँ बाँटने जाते थे। यह परंपरा मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि इससे न केवल रिश्तों में मिठास बढ़ती है, बल्कि समाज के सभी लोग एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा करते हैं।
दिवाली का असली मतलब मेरे लिए यही है – खुशियाँ बाँटना, रिश्तों को मजबूत बनाना, और अपने घर-परिवार के साथ समय बिताना। इस त्योहार ने मुझे यह सिखाया है कि जीवन में खुशियाँ छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती हैं, जैसे दीयों की रोशनी में, माँ के हाथ की बनी मिठाइयों में, और परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाने में।
समाप्ति: Mera Priya Tyohaar Essay In Hindi-Diwali: मेरा प्रिय त्योहार पर निबंध – दिवाली
हर बार जब दिवाली आती है, तब मैं अपने बचपन की यादों में खो जाता हूँ। मुझे वह समय याद आता है, जब मैं अपने भाई-बहनों के साथ पटाखे चलाता था, माँ के साथ रंगोली बनाता था, और पिताजी के साथ पूजा करता था। आज भी दिवाली का त्योहार आते ही, मेरे दिल में वही उत्साह और उमंग जाग उठती है। दिवाली मेरे लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मेरे जीवन की सबसे प्यारी यादों का हिस्सा है। इसलिए यह मेरा सबसे प्रिय त्योहार है, जो हर साल मेरे जीवन में नई रौशनी और खुशियों का संचार करता है।
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